आग लगाने से न चूकेगा, और आखिर यही हुआ। खैर, मेरे जीते-जी तो उसकी मुराद पूरी न होगी, साथ ही आप लोगों को भी अब पूरा बन्दोबस्त रखना चाहिए।’’ तेजसिंह ने हाथ जोड़ अर्ज किया, ‘‘इसमें कोई शक नहीं कि शिवदत्त अब जरूर फौज लेकर चढ़ आवेगा इसलिए हम लोगों को भी मुनासिब है कि अपनी फौज का इन्तजाम और लड़ाई का सामान पहले से कर रखें। यों तो शिवदत्त की नीयत तभी मालूम हो गई थी जब उसने ऐयारों को भेजा था, पर अब कोई शक नहीं रहा।’’ महाराज ने कहा, ‘‘मैं इस बात को खूब जानता हूँ कि शिवदत्त के पास तीस हजार फौज है और हमारे पास सिर्फ दस हजार, मगर क्या मैं डर जाऊंगा !’’ तेजसिंह ने कहा, ‘‘दस हजार फौज महाराज की और पांच हजार फौज हमारे सरकार की, पन्द्रह हजार हो गई, ऐसे गीदड़ के मारने को इतनी फौज काफी है। अब महाराज दीवान साहब को एक खत देकर नौगढ़ भेंजे, मैं जाकर फौज ले आता हूँ, बल्कि महाराज की


164 of 692

खड़े होकर जफील बजाई। थोड़ी देर में तीनों ऐयार मय पण्डित जगन्नाथ ज्योतिषी के उसी जगह पहुंचे और भगवानदत्त को खड़े देखकर बोले, ‘‘क्यों जी, तुम नौगढ़ गये थे ना ? क्या किया, खाली क्यों चले आये ?’’ तेजसिंह ने सबों को पहचानने के बाद जवाब दिया, ‘‘वहाँ तेजसिंह की बदौलत कोई कार्रवाई न चली, तुम लोगों में से कोई एक आदमी मेरे साथ चले तो काम बने !’’ पन्नाः अच्छा कल हम तुम्हारे साथ चलेंगे, आज चलो महल में कोई कार्रवाई करें। तेजसिंह: अच्छा चलो, मगर मुझको इस वक्त भूख बड़े जोर की लगी है, कुछ खा लूं


164 of 1085