को महारानी की खोज में भेजने के बाद अहमद और नाज़िम को साथ लेकर पंडित बद्रीनाथ महाराज को कैद से छुड़ाने गये हैं, देखें वह क्या जस लगा कर आते हैं। पन्ना-भला हम लोगों का मुंह भी तो हो कि चुनार जाकर उनका हाल सुनें और क्या जस लगा कर आते हैं इसको देखें, अगर महारानी न मिलीं तो कौन मुंह ले के चुनार जायेंगे? राम-बस मालूम हो गया कि आज जो शख्स महारानी को इस फुर्ती से चुरा ले गया वह हम लोगों का ठीक उस्ताद है। अब तो इसी जंगल में खेती करो,लड़के-बाले लेकर आ बसो, महारानी का मिलना मुश्किल है। पन्ना-वाह रे तेरा हौसला, क्या पिनिक के औतार हुए हैं 1 थोड़ी दूर जाकर ये लोग आपस में कुछ बातें कर मिलने का ठिकाना ठहरा अलग हो गये। शब्दार्थ: ↑ हम पहचान गये ↑ चुप रहोगी तो तुम्हारी भी जान बच जायेगी ↑ मेरी बेड़ी तोड़ दो, नहीं तो गुल कर गिरफ्तार करा दूंगी ↑ तुम्हारी क्या दशा होगी ↑ रानी


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लो पहचान उठो देखो भालो, खोजो खोज निकालो’’ यह कह वह दांत दिखलाता उछलता-कूदता भाग गया। चन्द्रकान्ता ( दूसरा भाग : पहला बयान) इस आदमी को सभी ने देखा मगर हैरान थे कि यह कौन है, कैसे आया और क्या कह गया। तेजसिंह ने जोर से पुकार के कहा, “आप लोग चुप रहें, मुझको मालूम हो गया कि यह सब ऐयारी हुई है, असल में कुमारी और चपला दोनों जीती हैं, यह लाशें उन लोगों की नहीं


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