गईं। अब तुमको भी मुनासिब है कि हमारी मदद करो, जो कुछ हमको मिलेगा उससे हम तुमको भी हिस्सा देंगे।’’ केतकी ने कहा, ‘‘सुनो जी, मैं उम्मीद के ऊपर जान देने वाली नहीं हूँ, वे कोई दूसरे होंगे। मैं तो पहले दाम लेती हूँ। अब इस वक्त अगर कुछ मुझको दो तो मैं अभी तेजसिंह को तुम्हारे हाथ गिरफ्तार करा दूं। नहीं तो जाओ, जो कुछ करते हो करो।’’ तेजसिंह की गिरफ्तारी का हाल सुनते ही दोनों की तबीयत खुश हो गई ! नाजिम ने कहा, ‘‘अगर तेजसिंह को पकड़वा दो तो जो कहो हम तुमको दें।’’ केतकीः एक हजार रुपये से कम मैं हरगिज न लूंगी। अगर मंजूर हो तो लाओ रुपये मेरे सामने रखो। नाजिमः अब इस वक्त आधी रात को मैं कहां से रुपये लाऊं, हाँ कल जरूर दे दूँगा। केतकीः ऐसी बातें मुझसे न करो। मैं पहले ही कह चुकी हूँ कि मैं उधार सौदा नहीं करती, लो मैं जाती हूँ। नाजिमः (आगे से रोक कर) सुनो तो, तुम


34 of 692

बात कह सुनाऊँ। सब लौंडियां हटा दी गईं और केवल चन्द्रकान्ता, चपला और चम्पा रह गईं। अब केतकी ने हँसकर कहा, ‘‘कुछ इनाम तो दो खुशखबरी सुनाऊं।’’ चन्द्रकान्ता ने समझा कि शायद वह कुछ वीरेन्द्रसिंह की खबर लाई है, मगर फिर यह भी सोचा कि मैंने तो आजतक कभी वीरेन्द्रसिंह का नाम भी इसके सामने नहीं लिया तब यह क्या मामला है ? कौन-सी खुशखबरी है जिसके सुनाने के लिए यह पहले ही से इनाम माँगती है ? आखिर चन्द्रकान्ता ने केतकी से कहा, ‘‘हाँ हाँ, इनाम दूंगी, तू कह तो सही, क्या खुशखबरी लाई है ?’’ केतकी ने कहा,


34 of 1085