है? कुमार-क्या कुछ पता लगा? तेज-पता क्या आंख से देख आये हैं तभी तो इतनी सजा मिली। उनके साथ भी एक से एक बढ़ के ऐयार हैं, अगर ऐसा जानते तो होशियारी से जाते। कुमार-भला खुलासा कहो तो कुछ मालूम भी हो। तेजसिंह ने सब हाल कहा, कुमार सुनकर हंसने लगे और ज्योतिषीजी से बोले, “आपके रमल को भी उन लोगों ने धोखा दिया।” ज्यो-कुछ न पूछिए, सब आफत हैं! कुमार-उन लोगों का खुलासा हाल नहीं मालूम हुआ तो भला इतना ही विचार लेते कि शिवदत्त के ऐयारों की कुछ ऐयारी तो नहीं है? ज्यो-नहीं, शिवदत्त के ऐयारों से और उन लोगों से कोई वास्ता नहीं बल्कि उन लोगों को इनकी खबर भी न होगी, इस बात को मैं खूब विचार चुका हूं। तेज-इतनी ही खैरियत है। देवी-आज दिन ही को चलकर पता लगायेंगे। तेज-तिलिस्म तोड़ने का काम कैसे चलेगा? कुमार-एक रोज काम बंद रहेगा तो क्या होगा?
यहां दम निकला जाता है। ढूंढना चाहिए यह कौन है? तेजसिंह और देवीसिंह इधर-उधर देखने लगे पर कहीं कुछ पता न चला। फिर आवाज आई, “इधर देखो।” आवाज की सीधा पर एक तरफ सिर उठाकर तेजसिंह ने देखा कि पेड़ पर से जगन्नाथ ज्योतिषी नीचे उतर रहे हैं। जगन्नाथ ज्योतिषी उतरकर तेजसिंह के सामने आये और बोले, “आप हैरान मत होइए, ये सब बातें जो ठीक होने वाली हैं मैंने ही कही हैं। इसके सोचने की भी जरूरत नहीं कि मैं महाराज शिवदत्त का तरफदार होकर आपके हित में बातें क्यों कहने लगा? इसका सबब भी थोड़ी देर में मालूम हो