उसे नजदीक से देखा तो निहायत हसीन और चंचल पाया। जवाब दिया, “मैं नहीं जानता यह बाग किसका है, अगर हो सके तो बताओ कि यहां का मालिक कौन है?” औरत-हमने जो कुछ पूछा है पहले उसका जवाब दे लो फिर हमसे जो पूछोगे सो बता देंगे। कुमार-मुझे कुछ भी मालूम नहीं कि मैं यहां क्यों कर आ गया! औरत-क्या खूब! कैसे सीधो-सादे आदमी हैं (दूसरी औरत की तरफ देखकर) बहिन, जरा इधर आना, देखो कैसे भोले-भाले चोर इस बाग में आ गये हैं जो अपने आने का सबब भी नहीं जानते! उस औरत के आवाज देने पर सबों ने आकर कुमार को घेर लिया और पूछना शुरू किया, “सच बताओ तुम कौन हो और यहां क्यों आये?” दूसरी औरत-जरा इनके कमर में तो हाथ डालो, देखो कुछ चुराया तो नहीं? तीसरी-जरूर कुछ न कुछ चुराया होगा। चौथी-अपनी सूरत इन्होंने कैसी बना रखी है, मालूम होता है कि किसी राजा ही के लड़के हैं।
लिया। शोर-गुल की आवाज आने लगी, ‘मारो-पकड़ो’ की आवाज सुनाई देने लगी। बंदूक की आवाज कान में पड़ी। अब सब औरतों को यकीन हो गया कि डाका पड़ा और लड़ाई हो रही है। खलबली पड़ गई। रावटी में जितनी औरतें थीं इधर-उधर दौड़ने लगीं। महारानी घबड़ाकर ”चंपा-चंपा” पुकारने लगीं, मगर कहीं पता नहीं, चंपा दिखाई न पड़ी। वे दोनों औरतें जो नई आई थीं आकर कहने लगीं, “मालूम होता है चंपा निकल गई मगर आप मत घबराइये, यह सब आप ही के नौकर हैं जिन्होंने डाका मारा है। मैं भी आप ही का ताबेदार हूं, औरत न समझिये।” मैं जाती हूं।