तुम नहीं समझतीं यह चालाकी से भागना चाहते हैं। चौथी-अब इनको गिरफ्तार करके ले चलना चाहिए। कुमार-भला मुझे कहां ले चलोगी? एक औरत-अपने मालिक के सामने। कुमार-तुम्हारे मालिक का क्या नाम है? एक-ऐसी किसकी मजाल है जो हमारे मालिक का नाम ले! कुमार-क्या तुम्हें अपने मालिक का नाम बताने में भी कुछ हर्ज है! दूसरी-हर्ज! नाम लेते ही जुबान कटकर गिर पड़ेगी! कुमार-तो तुम लोग अपने मालिक से बातचीत कैसे करती होओगी? दूसरी-मालिक की तस्वीर से बातचीत करते हैं, सामना नहीं होता। कुमार-अगर कोई पूछे कि तुम किसकी नौकर हो तो कैसे बताओगी? तीसरी-हम लोग अपने मालिक राजकुमारी की तस्वीर अपने गले में लटकाए रहती हैं जिससे मालूम हो कि हम सब फलाने की लौंडी हैं। कुमार-क्या यहां कई राजकुमारी हैं जो लौंडियों की पहचान में गड़बड़ी हो जाने का डर है? पहली-नहीं,


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रही थीं। इतने में पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल एक डोली जिस पर कि मख्वाब का पर्दा पड़ा हुआ था लिये हुए उस रावटी के दरवाजे पर पहुंचे, डोली बाहर रख दी, आप अंदर गये और सब औरतों को अच्छी तरह देखने लगे, फिर पूछा-”तुम लोगों में से दो औरतें दिखाई नहीं देतीं, वे कहां गई?” सब औरतें डरी हुई थीं, किसी के मुंह से आवाज न निकली। पन्नालाल ने फिर कहा, “तुम लोग डरो मत, हम लोग डाकू नहीं हैं। तुम्हीं लोगों को छुड़ाने के लिए इतनी धूमधाम हुई है। बताओ वे दोनों औरतें कहां हैं?’ अब उन औरतों का जी कुछ ठिकाने हुआ। एक


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