यहां सिर्फ दो राजकुमारी हैं और दोनों के यहां यही चलन है, कोई अपने मालिक का नाम नहीं ले सकता। जब पहचान की जरूरत होती है तो गले की तस्वीर दिखा दी जाती है। कुमार-भला मुझे भी वह तस्वीर दिखाओगी? “हां, हां, लो देख लो!” कहकर एक ने अपने गले में की छोटी-सी तस्वीर जो धुकधुकी की तरह लटक रही थी निकालकर कुमार को दिखाई जिसे देखते ही उनके होश उड़ गये। यह तस्वीर तो कुमारी चंद्रकान्ता की है! तो क्या ये सब उन्हीं की लौंडी हैं। नहीं-नहीं, कुमारी चंद्रकान्ता यहां भला कैसे आवेंगी? उनका राज्य तो विजयगढ़ है। अच्छा पूछें तो यह मकान किस शहर में है? कुमार-भला यह तो बताओ इस शहर का क्या नाम है जिसमें हम इस वक्त हैं! एक-इस शहर का नाम चित्रनगर है क्योंकि सबों के गले में कुमारी की तस्वीर लटकती रहती है। कुमार-और इस शहर का यह नाम कब से पड़ा? एक-बरसों-बरस से यही नाम है और इसी रंग
ने कहा, “दो नहीं बल्कि चार औरतें गायब हैं जिनमें दो औरतें तो वे हैं जो कल और परसों फंस के आई थीं, वे दोनों तो एक औरत को यह कह के चली गईं कि आप डरिये मत, हम लोग आपके ताबेदार हैं, डोली लेकर आते हैं तो आपको ले चलते हैं। इसके बाद डोली आई जिस पर चढ़ के वह चली गई, और चौथी तो सब के पहले ही निकल गई थी।” पन्नालाल के तो होश उड़ गए, रामनारायण और चुन्नीलाल के मुंह की तरफ देखने लगे। रामनारायण ने कहा, “ठीक है, हम दोनों महारानी को ढाढ़स देकर तुम्हारी खोज में डोली लेने चले गये, जफील बजाकर तुमसे