नहीं कहां कैद कर रखा है। जीत-(घबराकर) यह कैसे मालूम हुआ कि उन्हें कई औरतें ले गईं? जासूस-उनके गायब हो जाने के बाद ऐयारों ने बहुत तलाश किया। जब कुछ पता न लगा तो ज्योतिषी जगन्नाथजी ने रमल से पता लगाकर कहा कि कई औरतें उन्हें ले गई हैं और इस नौगढ़ के इलाके में ही कहीं कैद कर रखा है? जीत-(ताज्जुब से) इसी नौगढ़ के इलाके में! यहां तो हम लोगों का कोई दुश्मन नहीं है! जासूस-जो कुछ हो, ज्योतिषीजी ने तो ऐसा ही कहा है। जीत-फिर तेजसिंह कहां गया? जासूस-कुमार की खोज में कहीं गये हैं, देवीसिंह और ज्योतिषीजी भी उनके साथ हैं। मगर उन लोगों के जाते ही हमारे लश्कर पर आफत आई? जीत-(चौंककर) हमारे लश्कर पर क्या आफत आई? जासूस-मौका पाकर महाराज शिवदत्त ने हमला कर दिया। हमले का नाम सुनते ही तेजसिंह वगैरह ऐयार लोग जो सूरत बदले हुए एक कोने में
वाला और कोई नहीं जितनी जल्दी तुम मिला सकते हो। अभी मुझको उनके पास पहुंचाओ, देर मत करो, मैं तुम लोगों का बड़ा जस मानूंगी! तेज-तो इस तरह डोली में आप नहीं जा सकतीं, मैं बहोश करके आपको ले जा सकता हूं। महारानी-मुझको यह भी मंजूर है, किसी तरह वहां पहुंचाओ। तेज-अच्छा तब लीजिए इस शीशी को सूंघिये। महारानी को अपने पति के साथ बड़ी ही मुहब्बत थी, अगर तेजसिंह उनको कहते कि तुम अपना सिर दे दो तब महाराज से मुलाकात होगी तो वह उसको भी कबूल कर लेतीं। महारानी बेखटके शीशी सूंघकर बेहोश