मंजूर किया था, पर जब राजकुमारी चन्द्रकान्ता ही इस दुनिया से चली गयी तब मैं किसी से ब्याह नहीं कर सकता, इकरार दोनों से एक साथ ही शादी करने का है।” योगी : (वनकन्या की तरफ देखकर) क्यों री, तू मुझे बनाना चाहती है? वनकन्या : (हाथ जोड़कर) नहीं महाराज मैं, आपको कैसे झूठा बना सकती हूं। आप इनसे यह पूछे कि इन्होंने कैसे मालूम किया कि चन्द्रकान्ता मर गई? योगी : (कुमार से) कुछ सुना! यह लड़की क्या कहती है? तुमने कैसे जाना कि कुमारी चन्द्रकान्ता मर गई? कुमार : (कुछ चौकन्ने होकर) क्या कुमारी जीती हैं? योगी : जो मैं पूछता हूं पहले उसका जवाब दे लो। कुमार : पहले जब मैं इस खोह में आया था तब इस जगह मैंने कुमारी चन्द्रकान्ता और चपला को देखा ही नहीं था बल्कि बातचीत भी की थी। आज उन दोनों की जगह इन दो लाशों को देखने से मालूम हुआ कि वे दोनों…(इतना कहना था कि गला भर आया) योगी
होते हुए सब के सब भागे। भागने के वक्त जमीन हिलने के सबब से किसी का पैर सीधा नहीं पड़ता था। खण्डहर के बाहर हो दूर से खड़े होकर उसकी तरफ देखने लगे। पूरे मकान को हिलते देखा। दो घण्टे तक यही कैफियत रही और तब तक खण्डहर की इमारत का हिलना बंद न हुआ। तेजसिंह ने ज्योतिषीजी से कहा, “आप रमल और नजूम से पता लगाइये कि यह तिलिस्म किस तरह और किसके हाथ से टूटेगा?” ज्योतिषीजी ने कहा, “आज दिन भर आप लोग सब्र कीजिए और जो कुछ सोचना हो सोचिए, रात को मैं सब हाल रमल से दरियाफ्त कर लूंगा, फिर कल जैसा