मैंने क्या गलती की? कुमार : कल योगी ने दीवार से निकलकर मुझे कूदने से रोका, इसके बाद ज़मीन पर लात मारी और वहां की ज़मीन फट गई और वनकन्या निकल आई, तो योगी कोई देवता तो थे नहीं कि लात मार के ज़मीन फाड़ डालते। ज़रूर वहां की ज़मीन के अन्दर कोई रहस्य है। तुम्हें भी मुनासिब था कि उसी तरह लात मारके देखते कि ज़मीन फटती है या नहीं। तेज़सिंह : ठीक है। चलिये। आज फिर कुमार और तीनों ऐयार उस तिलिस्म में गये। मामूली राह से घूमते हुए उसी दलान में पहुंचे जहां योगी निकले थे। जाकर देखा तो वे दोनों सड़ी और जानवरों की खाई हुई लाशें वहां न थीं, ज़मीन धोई साफ मालूम पड़ती थी। थोड़ी देर तक ताज्जुब से भरे ये लोग खड़े रहे, इसके बाद तेज़सिंह ने गौर करके उसी जगह ज़ोर से लात मारी जहां योगी ने लात मारी थी। फौरन उसी जगह से ज़मीन फट गई और नीचे उतरने के लिए छोटी-छोटी सीढ़ियां नज़र पड़ीं। खुशी-खुशी
जमाया हुआ है। उसको उखाड़कर सिर के में खूब महीन पीसकर बगुले के सारे अंग पर लेप कर दो। वह भी मसाले ही का बना हुआ है, दो घंटे में बिल्कुल गलकर बह जायगा। उसके नीचे जो कुछ तार-चर्खे पहिये पुर्जे हो सब तोड़ डालो। नीचे एक कोठरी मिलेगी जिसमें बगुले के बिगड़ जाने से बिल्कुल उजाला हो गया होगा। उस कोठरी से एक रास्ता नीचे उस कुएं में गया है जो पूरब वाले दलान में है। वहां भी मसाले से बना एक बुङ्ढा आदमी हाथ में किताब लिये दिखाई देगा। उसके हाथ से किताब ले लो, मगर एकाएक मत छीनो नहीं तो धोखा खाओगे! पहले उसका दाहिना बाजू