मैंने तो तुम्हें छोड़ दिया, चाहे जहां जाओ, मगर एक दफे फिर कहता हूं कि अगर तुम यहां रहना कबूल करो तो मेरे राज्य का कोई काम जो चाहो मैं खुशी से तुमको दूं, तुम यहीं रहो। शिव : नहीं अब यहां न रहूंगा, मुझे छुट्टी दे दीजिये। इस मकान के चारों तरफ से पहरा हटा दीजिए, रात को जब मेरा जी चाहेगा चला जाऊंगा। सुरेन्द्र : अच्छा, जैसी तुम्हारी मर्जी। महाराज शिवदत्त के चारों ऐयार चुपचाप बैठे सब बातें सुन रहे थे। बात खत्म होने पर दोनों राजाओं के चुप हो होने के बाद महाराज शिवदत्त की तरफ देखकर पंडित बद्रीनाथ ने कहा, ‘‘आप तो अब तपस्या करने जाते हैं हम लोगों के लिए क्या हुक्म होता है?’’ शिव : जो तुम लोगों के जी में आये वो करो, जहां चाहो जाओ, हमने अपनी तरफ से तुम लोगों को छुट्टी दे दी, बल्कि अच्छी बात हो कि तुम लोग कुंवर वीरेन्द्रसिंह के साथ रहना पसन्द करो, क्योंकि ऐसा बहादुर और धार्मिक राजा तुम लोगों को न मिलेगा।
को पढ़ियेगा।” कुमार ने हंसकर कहा, “जब कुल तिलिस्म टूट लेगा तब फूलों के गुण पढ़े जायेंगे।” तेजसिंह ने बड़ी खुशामद की, आखिर लाचार होकर कुमार ने जिल्द खोली। उस वक्त सिवाय इन चारों आदमियों के उस खेमे में और कोई न था, सब बाहर कर दिये गये। कुमार पढ़ने लगे- फूलों के गुण: (1) गुलाब का फूल-अगर पानी में घिसकर किसी को पिलाया जाय तो उसे सात रोज तक किसी तरह की बेहोशी असर न करेगी। (2) मोतिये का फूल-अगर पानी में थोड़ा-सा घिसकर किसी कुएं में डाल दिया जाय तो चार पहर तक उस कुएं का पानी बेहोशी