मिलती है उसके साथ उतनी ही खुशी से ज़िंदगी बीतती है। कुमार : तुमने चपला के लिए कौन-सी तकलीफ उठाई? तेज़सिंह : तो चपला ने ही मेरे लिए कौन-सा दुःख भोगा? जो कुछ किया कुमारी चन्द्रकान्ता के लिए। ज्योतिषी : क्यों तेज़सिंह, क्या यह चपला तुम्हारी ही जात की है? तेज़सिंह : इसका हाल तो कुछ मालूम नहीं कि यह कौन जात है, लेकिन जब मुहब्बत हो गयी तो फिर चाहे कोई जात हो। ज्योतिषी : लेकिन क्या उसका कोई वारिस भी नहीं है? अगर तुम्हारी जाति की न हुई तो उसके मां-बाप कब कबूल करेंगे? तेज़सिंह : अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ तो उसको मार डालूंगा और अपनी भी जान दे दूंगा। कुमार : कुछ इनाम तो दो हम चपला का हाल तुम्हें बता दें। तेज़सिंह : इनाम में हम चपला ही को आपके हवाले कर देंगे। कुमार : खूब याद रखना, चपला फिर हमारी हो जायेगी। तेज़सिंह : जी हां, जी हां, आपकी हो जायेगी।
सुनते मगर सिवाय जमीन देखने के जवाब किसी को नहीं देते थे। पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल पंडित बद्रीनाथ को छोड़ अलग हो गये और कुमार से बोले, “ईश्वर के वास्ते किसी तरह बद्रीनाथ की जान बचाइये!” कुमार ने कहा, “भला हम क्या कर सकते हैं, कुल हाल तिलिस्म का मालूम नहीं, जो किताब तिलिस्म से मुझको मिली थी, जिसे पढ़कर तिलिस्म तोड़ते, वह तुम लोगों ने गायब कर ली। अगर मेरे पास होती तो उसमें देखकर कोई तरकीब इनके छुड़ाने की करता, हां अगर तुम लोग वह किताब मुझे दे दो तो जरूर बद्रीनाथ इस आफत से छूट सकते हैं।”