ऐयार लोग भी बड़ी मुस्तैदी से उसकी गिरफ्तारी की फिक्र में लगे हुए हैं। महाराज – ‘यहाँ तो उसने कई खून किए।’ बद्रीनाथ – ‘शहर में आते ही मुझे खबर लग चुकी है, खैर, देखा जाएगा।’ महाराज – ‘अगर ज्योतिषी जी को भी साथ लाते तो उनके रमल की मदद से बहुत जल्द गिरफ्तार हो जाता।’ बद्रीनाथ – ‘महाराज, जरा इसकी बहादुरी की तरफ ख्याल कीजिए कि इश्तिहार दे कर डंके की चोट काम कर रहा है। ऐसे शख्स की गिरफ्तारी भी उसी तरह होनी चाहिए। ज्योतिषी जी की मदद की इसमें क्या जरूरत है।’ महाराज – ‘देखें वह कैसे गिरफ्तार होता है, शहर भर उसके खौफ से काँप रहा है।’ बद्रीनाथ – ‘घबराइए नहीं, सुबह-शाम में किसी न किसी को गिरफ्तार करता हूँ।’ महाराज – ‘क्या वे लोग कई आदमी हैं?’ बद्रीनाथ – ‘जरूर कई आदमी होंगे। यह अकेले का काम नहीं है कि यहाँ से नौगढ़ तक की खबर रखे और
तस्वीर की तरफ देख लंबी सांस ली, साथ ही आंखें डबडबा आईं, बल्कि कई बूंद आंसुओं की भी गिर पड़ीं। इस बीच में कुमार की निगाह भी उसी तस्वीर पर जा पड़ी, एकटक देखते रहे और जब वनकन्या बहुत दूर निकल गई तब फतहसिंह से बातचीत करने लगे। कुमार-क्यों फतहसिंह, यह कौन है कुछ जानते हो? फतहसिंह-मैं कुछ भी नहीं जानता मगर इतना कह सकता हूं कि किसी राजा की लड़की है। कुमार-यह किताब जो इसके हाथ में है जरूर वही है जो मुझको तिलिस्म से मिली थी, जिसको शिवदत्त के ऐयारों ने चुराया था, जिसके लिए तेजसिंह