में डाली जाए। वक्त टाल के क्यों नहीं चलते?’ आफत – ‘तुम तो गधे हो, कुछ खबर भी है कि हमने ऐसा क्यों किया?’ जालिम – ‘अब यह तो तुम जानो।’ आफत – ‘सुनो मैं बताता हूँ। मेरी नीयत यह है कि जहाँ तक हो सके जल्दी से उन लोगों को मार-पीट सब मामला खतम कर दूँ। उस वक्त वहाँ जितने आदमी मौजूद होंगे सभी को बस तुम मुर्दा ही समझ लो, बिना हाथ-पैर हिलाए सभी का काम तमाम करूँ तो सही।’ जालिम – ‘भला उस्ताद, यह कैसे हो सकता है?’ आफत – (बटुए में से एक गोला निकाल कर और दिखा कर) ‘देखो, इस किस्म के बहुत से गोले मैंने बना रखे हैं जो एक-एक तुम लोगों के हाथ में दे दूँगा। बस वहाँ पहुँचते ही तुम लोग इन गोलों को उन लोगों के हजूम (भीड़) में फेंक देना जो हम लोगों को गिरफ्तार करने के लिए मौजूद होंगे। गिरते ही ये गोले भारी आवाज दे कर फूट जाएँगे और इनमें से बहुत-सा धुआँ निकलेगा जिसमें
पूछ लेंगे कि यह कौन है।” जब कुमार अपने खेमे में फतहसिंह और उस ऐयार को लिये हुए पहुंचे तो बोले, “अब इससे पूछो इसका नाम क्या है?” फतहसिंह ने जवाब दिया, “भला यह ठीक-ठीक अपना नाम क्यों बतावेगा, देखिये मैं अभी मालूम किये लेता हूं।” फतहसिंह ने गरम पानी मंगवाकर उस ऐयार का मुंह धुलाया, अब साफ पहचाने गये कि यह पंडित बद्रीनाथ हैं। कुमार ने पूछा, “क्यों अब तुम्हारे साथ क्या किया जाय?” बद्रीनाथ ने जवाब दिया, “जो मुनासिब हो कीजिये।” कुमार ने फतहसिंह से कहा, “इनकी तुम हिफाजत करो, जब तेजसिंह आवेंगे तो