वे लोग छिप जाएँगे, आँखों में धुआँ लगते ही अंधे हो जाएँगे और नाक के अंदर जहाँ गया कि उन लोगों की जान गई, ऐसा जहरीला यह धुआँ होगा। आफत खाँ की बात सुन कर सब-के-सब मारे खुशी के उछल पड़े। जालिम खाँ ने कहा – ‘भला उस्ताद, एक गोला यहाँ पटक के दिखाओ, हम लोग भी देख लें तो दिल मजबूत हो जाएगा।’ ‘हाँ देखो।’ यह कह के आफत खाँ ने वह गोला जमीन पर पटक दिया, साथ ही एक आवाज दे कर गोला फट गया और बहुत-सा जहरीला धुआँ फैला जिसको देखते ही आफत खाँ, जालिम खाँ और उनके साथी लोग जल्दी से हट गए इस पर भी उन लोगों की आँखें सूज गईं और सिर घूमने लगा। यह देख कर आफत खाँ ने अपने बटुए में से मरहम की एक डिबिया निकाली और सभी की आँखों में वह मरहम लगाया तथा हाथ में मल कर सुँघाया जिससे उन लोगों की तबीयत कुछ ठिकाने हुई और वे आफत खाँ की तारीफ करने लगे। जालिम – ‘वाह
वही इनका फैसला करेंगे!” यह सुन फतहसिंह बद्रीनाथ को ले अपने खेमे में चले गये। शाम को बल्कि कुछ रात बीते तेजसिंह, देवीसिंह और ज्योतिषीजी लौटकर आये और कुमार के खेमे में गए। उन्होंने पूछा, “कहो कुछ पता लगा?” तेजसिंह-कुछ पता न लगा, दिन भर परेशान हुए मगर कोई काम न चला। कुमार-(ऊंची सांस लेकर) फिर अब क्या किया जायेगा? तेज-किया क्या जायेगा, आज-कल में पता लगेगा ही। कुमार-हमने भी एक ऐयार को गिरफ्तार किया है। तेज-हैं, किसको? वह कहां है! कुमार-फतहसिंह के पहरे में है,